स्पोर्ट्स इंजरी क्लिनिक में क्या होता है
क्लिनिक में मुकाबलों में खेलने वाले खिलाड़ी, छुट्टी के दिन खेलने वाले लोग, जिम जाने वाले और दौड़ने वाले, सभी आते हैं। हर विज़िट का मकसद तीन सवालों के जवाब देना होता है: ठीक-ठीक चोट किस हिस्से में है, सर्जरी की ज़रूरत है या नहीं, और आप सुरक्षित रूप से दोबारा कब खेल सकते हैं।
डॉ. अभिषेक सक्सेना ने आर्थ्रोस्कोपी और स्पोर्ट्स मेडिसिन की ट्रेनिंग ली है, उनके पास फुटबॉल मेडिसिन में FIFA डिप्लोमा है, और उन्होंने कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई के सेंटर फॉर स्पोर्ट्स मेडिसिन में काम किया है। इलाज फिज़ियोथेरेपी और इंजेक्शन से लेकर दूरबीन (की-होल) सर्जरी और जोड़ बचाने वाली प्रक्रियाओं तक होता है।
किस खेल में कौन-सी चोटें आम हैं
| खेल | आम चोटें |
|---|---|
| क्रिकेट | थ्रो करने वालों और गेंदबाज़ों में रोटेटर कफ और कंधे पर ज़्यादा ज़ोर की तकलीफ़, ACL और मेनिस्कस का फटना, उंगली और कलाई की चोटें |
| फुटबॉल | ACL और मेनिस्कस का फटना, टखने की मोच, हैमस्ट्रिंग (जांघ के पीछे) और ग्रोइन (जांघ के ऊपर अंदर की तरफ़) में खिंचाव |
| कबड्डी | ACL और कोलेटरल लिगामेंट का फटना, मेनिस्कस का फटना, कंधे का डिस्लोकेशन (जोड़ का उतरना) |
| बैडमिंटन और टेनिस | रोटेटर कफ की समस्याएं, टेनिस एल्बो, एकिलीज़ (एड़ी के टेंडन) की चोटें, टखने की मोच |
| दौड़ना | रनर्स नी (घुटने के आगे का दर्द), शिन (घुटने के नीचे आगे की हड्डी) में दर्द, स्ट्रेस इंजरी (बार-बार के दबाव से होने वाली चोटें), एकिलीज़ की समस्याएं |
| जिम और वेटलिफ्टिंग | रोटेटर कफ और लैब्रम (कंधे के जोड़ की किनारी) की चोटें, कंधे का ढीलापन (इंस्टेबिलिटी), घुटने और पीठ में खिंचाव |
चोट लगने से चोट की पहचान तक
- 1
शुरुआती सलाह
क्या हुआ, यह फ़ोन या WhatsApp पर बताएं। आपको सलाह मिलेगी कि आराम कैसे करें, जोड़ को सहारा कैसे दें और कितनी जल्दी दिखाना चाहिए।
- 2
डॉक्टर की जांच
हाथ से जांच की जाती है: चोट वाला जोड़ कैसा है, वह कितना स्थिर है और आप कैसे हिल-डुल पाते हैं।
- 3
ज़रूरत हो तो उसी हफ़्ते MRI
अगर जांच से जोड़ के अंदर की चोट का संकेत मिले, तो उसी हफ़्ते MRI का इंतज़ाम किया जाता है, ताकि इलाज की योजना रुकी न रहे।
- 4
आपके खेल को ध्यान में रखकर योजना
फिज़ियोथेरेपी से लेकर सर्जरी तक के विकल्प, जिनमें आपका सीज़न, टीम में आपकी पोज़िशन और आपके लक्ष्य ध्यान में रखे जाते हैं।
खेल में वापसी का प्रोटोकॉल (तय तरीका)
सिर्फ़ समय बीत जाने से आपको खेलने की मंज़ूरी नहीं मिलती। हर चरण पास करने के बाद ही अगला चरण शुरू होता है।
चरण 1: चोट को शांत करना
दर्द और सूजन पर काबू, जोड़ की पूरी हरकत वापस लाना, और चोट वाले या ऑपरेशन से ठीक किए गए हिस्से की सुरक्षा।
चरण 2: ताकत बढ़ाना
फिज़ियोथेरेपी की देखरेख में ताकत और संतुलन दोबारा बनाना, और चोट वाली तरफ़ की तुलना दूसरी तरफ़ से करना।
चरण 3: दौड़ना और मुड़ना-कूदना
पहले सीधी लाइन में दौड़ना; फिर जैसे-जैसे नियंत्रण लौटे, दिशा बदलना, कूदकर उतरना और फुर्ती के अभ्यास।
चरण 4: अपने खेल की ट्रेनिंग
आपके खेल के हिसाब से ड्रिल और बिना टक्कर वाली प्रैक्टिस, जिसमें बोझ धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है।
चरण 5: खेलने की मंज़ूरी
ताकत, एक पैर पर कूदने (हॉप) और नियंत्रण के टेस्ट पास होने के बाद आप पूरी ट्रेनिंग में और फिर मुकाबलों में लौटते हैं।
टीमें और अकादमियां
कोच और अकादमियां अपने खिलाड़ियों की चोट की जांच और खेल में वापसी की योजना के लिए क्लिनिक से संपर्क कर सकते हैं।
स्पोर्ट्स इंजरी के आम इलाज
ACL रिकंस्ट्रक्शन (ACL सर्जरी)
अचानक मुड़ने-घूमने वाले खेलों के लिए घुटने का फटा लिगामेंट दोबारा बनाना।
घुटने की आर्थ्रोस्कोपी
आर्थ्रोस्कोपी का मतलब है दूरबीन (की-होल) सर्जरी। इसमें मेनिस्कस और कार्टिलेज की समस्याओं का इलाज होता है।
रोटेटर कफ रिपेयर
कंधे के फटे टेंडन को हड्डी से दोबारा जोड़ा जाता है।
कंधे के ढीलेपन (इंस्टेबिलिटी) की सर्जरी
बार-बार उतरने वाले कंधे को स्थिर किया जाता है।
टखने के लिगामेंट का इलाज
मोच और बार-बार मुड़ जाने वाले टखने का इलाज।
मेनिस्कस रिपेयर
जहां संभव हो, घुटने के फटे कार्टिलेज को बचाया जाता है।
मरीज़ों के आम सवाल
इसकी कोई आधिकारिक रैंकिंग नहीं है, इसलिए देखें कि डॉक्टर के पास स्पोर्ट्स मेडिसिन की ट्रेनिंग हो, आपकी जैसी चोट का अनुभव हो और खेल में वापसी की एक व्यवस्थित योजना हो। डॉ. अभिषेक सक्सेना के पास आर्थ्रोस्कोपी और स्पोर्ट्स मेडिसिन में फेलोशिप और फुटबॉल मेडिसिन में FIFA डिप्लोमा है, और वे दुर्गापुरा और वैशाली नगर में मरीज़ों को देखते हैं।
अगर दर्द, सूजन या कमज़ोरी कम नहीं हो रही, या जोड़ ढीला लग रहा है, तो कुछ दिनों के अंदर डॉक्टर को दिखाएं। अगर आप चोट वाले हिस्से पर वज़न नहीं डाल पा रहे, जोड़ का आकार बिगड़ा हुआ दिख रहा है, या जोड़ लॉक हो गया है या उतर गया है (डिस्लोकेशन), तो उसी दिन डॉक्टर के पास जाएं।
हमेशा नहीं। पहले डॉक्टर जांच करते हैं, और कई चोटों की पहचान MRI के बिना ही हो जाती है। MRI का इस्तेमाल तब होता है जब लिगामेंट, मेनिस्कस या टेंडन के फटने का शक हो, और ज़रूरत होने पर क्लिनिक उसी हफ़्ते इसका इंतज़ाम करता है।
खेल की कई चोटें फिज़ियोथेरेपी और योजना बनाकर दोबारा गतिविधि शुरू करने से ठीक हो जाती हैं। सर्जरी पर ऐसी चोटों में विचार किया जाता है, जैसे अचानक मुड़ने-घूमने वाले खेलों के खिलाड़ी में ACL का पूरा फटना, ऐसा फटा मेनिस्कस जिसे रिपेयर किया जा सके, या बार-बार का डिस्लोकेशन (जोड़ का उतरना)।
यह चोट पर निर्भर करता है। हल्की मोच में हफ़्तों का समय लग सकता है, जबकि ACL रिकंस्ट्रक्शन के बाद मुकाबले वाले खेल में लौटने में आमतौर पर 6 से 9 महीने लगते हैं। वापसी तब होती है जब ताकत और नियंत्रण के टेस्ट पास हो जाएं, सिर्फ़ कैलेंडर देखकर नहीं।
आमतौर पर सिर्फ़ शुरुआती दिनों में। लंबा आराम मांसपेशियों को कमज़ोर और जोड़ों को जकड़ा हुआ कर देता है, इसलिए देखरेख में हरकत और ताकत बढ़ाने वाली एक्सरसाइज़ आमतौर पर जल्दी शुरू हो जाती हैं। खेल में लौटने से पहले अपनी चोट के हिसाब से सलाह लें।
हां। क्लिनिक में मुकाबलों में खेलने वाले खिलाड़ियों के साथ-साथ छुट्टी के दिन क्रिकेट खेलने वालों, दौड़ने वालों, जिम जाने वालों और स्कूल के खिलाड़ियों का भी इलाज होता है, और योजना हर व्यक्ति के खेल और लक्ष्यों के हिसाब से बनाई जाती है।
हां। अपनी MRI और पुरानी रिपोर्ट साथ लाएं, या WhatsApp पर भेज दें। आपको साफ़-साफ़ बताया जाएगा कि सर्जरी की ज़रूरत है या नहीं और दूसरे विकल्प क्या हैं।

