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आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी

जयपुर में घुटने की आर्थ्रोस्कोपी

घुटने की आर्थ्रोस्कोपी दूरबीन (की-होल) सर्जरी है: पेंसिल जितने पतले कैमरे और बारीक औज़ारों से, दो या तीन छोटे चीरों के ज़रिए, फटे मेनिस्कस जैसी समस्याओं का इलाज होता है। जयपुर में फेलोशिप-प्राप्त आर्थ्रोस्कोपी सर्जन डॉ. अभिषेक सक्सेना इसे शाल्बी हॉस्पिटल, वैशाली नगर में करते हैं। यह आमतौर पर डे-केयर सर्जरी होती है, रिकवरी 2 से 6 हफ़्तों में।

अपडेट: 4 नवंबर 2026Read in English
एक नज़र में

आर्थ्रोस्कोपी का मतलब क्या है

घुटने की आर्थ्रोस्कोपी एक दूरबीन (की-होल) ऑपरेशन है, जिसे मिनिमली इनवेसिव सर्जरी भी कहते हैं। इसमें सर्जन आर्थ्रोस्कोप नाम के पेंसिल जितने पतले कैमरे से आपके घुटने के अंदर सीधे देख पाते हैं। दो या तीन छोटे चीरों के ज़रिए घुटने के अंदर की बड़ी लाइव तस्वीर स्क्रीन पर आती है, जिससे जोड़ की हर सतह की बारीकी से जांच हो सकती है।

इन्हीं छोटे चीरों से बहुत छोटे औज़ार जोड़ के अंदर जा सकते हैं, इसलिए जो समस्याएं मिलती हैं उनमें से ज़्यादातर का इलाज उसी ऑपरेशन में हो सकता है, जैसे फटे मेनिस्कस को ट्रिम करना या उसकी मरम्मत करना, खराब कार्टिलेज को चिकना करना, या ढीले टुकड़े निकालना। ओपन सर्जरी की तुलना में इसमें टिश्यू को कहीं कम नुकसान, कम दर्द, इन्फेक्शन का कम खतरा और सामान्य ज़िंदगी में कहीं जल्दी वापसी होती है।

किसे ज़रूरत है

घुटने की आर्थ्रोस्कोपी की सलाह कब दी जाती है

घुटने की कई समस्याएं बिना सर्जरी के ठीक हो जाती हैं। इन स्थितियों में आर्थ्रोस्कोपी पर विचार किया जाता है।

  • फटा मेनिस्कस, जिससे दर्द या सूजन हो, या घुटना अटके या लॉक हो जाए
  • जोड़ में तैरते कार्टिलेज या हड्डी के ढीले टुकड़े
  • जोड़ का खराब कार्टिलेज, जिसे ट्रिम करने या मरम्मत की ज़रूरत हो
  • ऐसा घुटना जिसमें फिज़ियोथेरेपी के बावजूद बार-बार सूजन या अटकन हो या जो जवाब दे जाता हो
  • जब स्कैन में घुटनों के दर्द की वजह साफ़ न हो, तब बीमारी की पुष्टि के लिए
चरण-दर-चरण

सर्जरी कैसे होती है

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    एनेस्थीसिया और चीरे

    स्पाइनल या जनरल एनेस्थीसिया देकर दो से तीन की-होल चीरे लगाए जाते हैं, और साफ़ दिखने के लिए कीटाणु-रहित तरल से जोड़ को धीरे से फैलाया जाता है।

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    अंदर की जांच

    आर्थ्रोस्कोप बड़ी तस्वीर भेजता है, जिससे डॉ. सक्सेना कार्टिलेज, मेनिस्कस और लिगामेंट की एक-एक करके जांच करते हैं।

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    इलाज

    बारीक औज़ारों से फटे मेनिस्कस की मरम्मत या ट्रिमिंग की जाती है, खुरदरे कार्टिलेज को चिकना किया जाता है, और ढीले टुकड़े हों तो निकाल दिए जाते हैं।

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    धुलाई और चीरे बंद करना

    जोड़ को धोया जाता है, तरल निकाला जाता है, और छोटे चीरों को एक टांके या चिपकने वाली पट्टियों से बंद करके हल्की ड्रेसिंग की जाती है।

तैयारी

आपकी सर्जरी से पहले

  • पूरी जांच और आपके स्कैन (एक्स-रे / MRI) को ध्यान से देखना, ताकि बीमारी की पुष्टि हो और सर्जरी की सटीक योजना बन सके।
  • ऑपरेशन से पहले के रूटीन खून के टेस्ट, ज़रूरत हो तो ECG, और एनेस्थीसिया के डॉक्टर की यह जांच कि आप एनेस्थीसिया के लिए फिट हैं।
  • खून पतला करने वाली दवाएं (जैसे एस्पिरिन या क्लोपिडोग्रेल) तभी बंद करना जब डॉक्टर सलाह दें, और आप जो भी दवा या सप्लीमेंट लेते हैं, उन सबके बारे में बताना।
  • सर्जरी से लगभग 6 घंटे पहले से खाली पेट रहना, और किसी ज़िम्मेदार बड़े व्यक्ति का इंतज़ाम करना जो आपको घर ले जाए और घर पर पहली रात आपके साथ रहे।
  • रिकवरी के लिए घर तैयार करना: आइस पैक, ढीले कपड़े, और चलने का ऐसा खाली रास्ता जिसमें ठोकर लगने का खतरा न हो।
रिकवरी

रिकवरी का समय

1-3 दिन

आराम करें, बर्फ लगाएं और पैर ऊंचा रखें। उसी दिन आप सहारे से चलेंगे और आपको हल्की हरकत व क्वाड्रिसेप्स (जांघ के आगे की मांसपेशी) की कसरतें सिखाई जाएंगी।

1-2 हफ़्ते

सूजन घटती है, ड्रेसिंग और टांकों की जांच होती है, और हरकत व ताकत वापस लाने के लिए निगरानी में फिज़ियोथेरेपी शुरू होती है।

3-6 हफ़्ते

इस समय तक ज़्यादातर लोग डेस्क का काम करने लगते हैं और ज़्यादा मेहनत वाले काम और रोज़ के कामकाज की ओर लौट रहे होते हैं; ताकत लौटने पर खेल शुरू होता है।

बाद की देखभाल

अच्छी रिकवरी के लिए क्या करें

  • शुरू से ही RICE का तरीका अपनाएं: आराम, दिन में कई बार 15-20 मिनट बर्फ की सिकाई, हल्का दबाव (कम्प्रेशन) और पैर ऊंचा रखना, ताकि सूजन काबू में रहे।
  • दर्द बढ़ने का इंतज़ार न करें, दर्द की दवा बताए अनुसार लें, और घाव को साफ़ और सूखा रखें।
  • फिज़ियोथेरेपी का हर सेशन करें और घर की कसरतें भी करें। रिहैबिलिटेशन उतना ही ज़रूरी है जितनी खुद सर्जरी।
  • काम-काज और चलना-फिरना धीरे-धीरे बढ़ाएं, और ऑपरेशन वाले जोड़ को बचाने के लिए तब तक खेल में न लौटें जब तक आपको साफ़ तौर पर मंज़ूरी न मिल जाए।
  • खतरे के इन संकेतों पर नज़र रखें: फैलता हुआ लालपन, बुखार, पिंडली में दर्द या बढ़ती सूजन। इनमें से कुछ भी दिखे तो हमें फ़ोन करें।
खर्च

आर्थ्रोस्कोपी का खर्च

खर्च इस पर निर्भर करता है कि किस चीज़ का इलाज होना है, कौन-सा हॉस्पिटल और कौन-सा कमरा है, इसलिए आपका स्कैन देखे बिना बताई गई रकम का ज़्यादा मतलब नहीं होगा।

लिखित कोटेशन के लिए अपना MRI WhatsApp पर भेजें। शाल्बी हॉस्पिटल में RGHS और कैशलेस कवर उपलब्ध है, जो आपकी योजना या पॉलिसी पर निर्भर करता है।

लिखित कोटेशन लें
जोखिम

जोखिम और नतीजे

मरीज़ों की बहुत बड़ी संख्या को अटकने और लॉक होने जैसे मैकेनिकल लक्षणों से भरोसेमंद राहत मिलती है, और वे कुछ ही हफ़्तों में अपनी सामान्य गतिविधियों पर लौट आते हैं। जब मेनिस्कस को निकालने की बजाय बचाया जाता है, तो घुटना आगे चलकर गठिया (आर्थराइटिस) से भी बेहतर बचा रहता है।

  • सूजन, नील या कुछ समय की जकड़न, जो रिहैबिलिटेशन से ठीक हो जाती है
  • इन्फेक्शन (ऐसा कम ही होता है), जिसका इलाज तुरंत एंटीबायोटिक से किया जाता है
  • पैर में खून का थक्का (ऐसा बहुत कम होता है), इसीलिए जल्दी चलने-फिरने को कहा जाता है
  • कभी-कभी, अगर जोड़ का नुकसान उम्मीद से ज़्यादा हो, तो लक्षण बने रह सकते हैं
वीडियो

देखें कि आर्थ्रोस्कोपी से कैसे मदद मिलती है

डॉ. सक्सेना अपने YouTube चैनल पर दूरबीन (की-होल) सर्जरी और रिकवरी के बारे में समझाते हैं।

YouTube पर देखें
सवाल-जवाब

मरीज़ों के आम सवाल

जयपुर के हॉस्पिटलों में आर्थ्रोस्कोपी की ट्रेनिंग वाले ऑर्थोपेडिक सर्जन इसे करते हैं। डॉ. अभिषेक सक्सेना के पास आर्थ्रोस्कोपी और स्पोर्ट्स मेडिसिन में फेलोशिप है। वे वैशाली नगर के शाल्बी मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में घुटने और कंधे की आर्थ्रोस्कोपी करते हैं, और दुर्गापुरा में भी कंसल्टेशन देते हैं।

आर्थ्रोस्कोपी का मतलब है आर्थ्रोस्कोप नाम के पतले कैमरे से जोड़ के अंदर देखना। इन्हीं छोटे चीरों से सर्जन जो समस्या मिले उसका इलाज भी कर सकते हैं, इसलिए इसे अक्सर दूरबीन (की-होल) या मिनिमली इनवेसिव जोड़ की सर्जरी कहा जाता है।

पहले कदम के तौर पर आमतौर पर नहीं। आर्थ्रोस्कोपी फटे मेनिस्कस से घुटना लॉक होने जैसी मैकेनिकल समस्याओं में मदद करती है। आम गठिया (आर्थराइटिस) के दर्द में आमतौर पर इसकी सलाह नहीं दी जाती, वहां पहले फिज़ियोथेरेपी, वज़न पर काबू और दूसरे इलाज आते हैं।

ज़्यादातर मरीज़ों को सुखद हैरानी होती है। तकलीफ़ आमतौर पर हल्की होती है, दर्द की साधारण दवा से अच्छी तरह काबू में रहती है, और ओपन सर्जरी के मुकाबले कहीं जल्दी ठीक हो जाती है।

उसी दिन आप सहारे से चलेंगे और आमतौर पर कुछ ही दिनों में बिना सहारे। गाड़ी चलाना आमतौर पर तब सुरक्षित होता है जब आप आराम से गाड़ी संभाल सकें और तेज़ दर्द की दवाएं बंद हो चुकी हों, अक्सर एक या दो हफ़्ते में।

डेस्क का काम करने वाले अक्सर कुछ दिनों से एक हफ़्ते में लौट आते हैं, जबकि शारीरिक मेहनत वाले काम में दो से चार हफ़्ते लग सकते हैं, जो इस पर निर्भर करता है कि किस चीज़ का इलाज हुआ।

हां। घुटने की पूरी ताकत, हरकत और भरोसा वापस पाने में सबसे बड़ी बात एक छोटा, तय फिज़ियोथेरेपी प्रोग्राम ही है।

चीरे सिर्फ़ लगभग एक सेंटीमीटर लंबे होते हैं और समय के साथ आमतौर पर हल्के निशान भर रह जाते हैं।

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अपना MRI लेकर आएं और साफ़ राय लें कि दूरबीन (की-होल) सर्जरी से मदद मिलेगी या उससे बचा जा सकता है।

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